बांग्लादेश क्रिकेट टीम के टी20 स्पेशलिस्ट ऑलराउंडर महेदी हसन ने टीम में लगातार मौके न मिलने पर निराशा व्यक्त की है। उनका मानना है कि बार-बार टीम से अंदर-बाहर होने के कारण वह इंटरनेशनल लेवल पर अपना बेस्ट प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खत्म हुई टी20 सीरीज के पहले मैच में महेदी हसन ने बेहतरीन प्रदर्शन किया था। उन्होंने नंबर 8 पर बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 29 रन बनाए और गेंदबाजी में 29 रन देकर 1 विकेट भी चटकाया। इसके बावजूद, उन्हें अगले दोनों मैचों की प्लेइंग XI से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
सिर्फ एक फॉर्मेट खेलने के बावजूद टीम में जगह पक्की नही- महेदी हसन
माना जा रहा है कि पहले मैच के पावरप्ले में विकेट न निकाल पाने के कारण टीम मैनेजमेंट ने उनकी जगह बाएं हाथ के स्पिनर नासुम अहमद को टीम में शामिल किया था। महेदी हसन ने टी-स्पोर्ट्स (T-Sports) से बातचीत में अपना दुख साझा करते हुए कहा कि एक क्रिकेटर के तौर पर मलाल तो रहता ही है। मैं सिर्फ टी20 फॉर्मेट खेलता हूं, लेकिन इसके बावजूद टीम में मेरी जगह पक्की नहीं है। अक्सर मुझे मैचअप या टीम कॉम्बिनेशन के नाम पर बाहर बैठना पड़ता है, जो बेहद निराशाजनक है। अगर मुझे लगातार खेलने का मौका मिले, तो मैं पहले से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर सकता हूं।
वन फॉर्मेट प्लेयर के लिए टीम में जगह बनाना मुश्किल होता है- महेदी हसन
महेदी का मानना है कि केवल एक ही फॉर्मेट खेलने वाले क्रिकेटर के लिए टीम में अपनी जगह बचाए रखना बहुत मुश्किल होता है। उन्होंने कहा कि जो खिलाड़ी तीनों फॉर्मेट खेलते हैं, वे लगातार इंटरनेशनल क्रिकेट के संपर्क में रहते हैं। लेकिन उन्हें सिर्फ टी20 खेलने के कारण मैचों के बीच में एक-दो महीने तक का इंतजार करना पड़ता है। कई बार तो दो या तीन मैचों की छोटी सीरीज में भी उन्हें सभी मैच खेलने को नहीं मिलते।
महेदी हसन ने भेदभाव पर भी उठाए सवाल
महेदी हसन ने बांग्लादेश क्रिकेट में बल्लेबाजों और गेंदबाजों के बीच होने वाले भेदभाव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मैंने बचपन से लेकर अब इंटरनेशनल क्रिकेट तक हमेशा इस तरह की मुश्किलों का सामना किया है। आपने भी ध्यान दिया होगा कि हमारे देश में एक बल्लेबाज को बार-बार खुद को साबित करने के कई मौके मिलते हैं, लेकिन गेंदबाजों के साथ ऐसा नहीं होता। हमारे देश के टॉप दो टी20 बल्लेबाजों को कभी भी टीम से बाहर नहीं किया जाता, तो यही नियम टॉप दो गेंदबाजों पर भी लागू होना चाहिए।
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